Aarti


आरती हनुमानजी की

हनुमान जी इस पृथ्वी पर उन सात मनीषियों में से एक हैं जिन्हें अमरत्व का वरदान प्राप्त है. इनके आराध्य देव श्री रामजी हैं. हनुमान जी की भक्ति करने वाले भक्त पर शनि देव भी कोई अशुभ प्रभाव नहीं डाल पाते. शनि के बुरे प्रभाव से बचने के लिए श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की आराधना करना ही सर्वोत्तम उपाय है. हनुमान जी का जन्म चैत्र मास के पूर्णिमा तिथि दिन मंगलवार नक्षत्र चित्रा व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे हुआ था. उन्हें भगवान शिवजी का 11वां रुद्रावतार माना जाता है. हनुमान जी सबसे बलवान और बुद्धिमान देवता माने जाते हैं. उनका पूजन एवं आरती करने वाले भक्त को कभी भी किसी प्रकार का...


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आरती कुंजबिहारी जी की

कुंजबिहारी की आरती  समस्त प्रसिद्ध आरतियों में से एक है. यह भगवान का पूजन करते समय यथा श्रीकृष्ण के जन्म जन्माष्टमी के अवसर पर कुंजबिहारी की आरती की स्तुति की जाती है. आरती अक्सर मंदिरों और घरों में गाई जाती है. कुंजबिहारी भगवान...


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आरती भगवान रामचन्द्र जी की

भगवान राम (रामचन्द्र) का अवतार अयोध्या के राजा दशरथ और कौशिल्या के यहां हुआ था. यह राजा दशरथ और कौशिल्या के सबसे बडे पुत्र थे. हिन्दू धर्मानुसार भगवान राम विष्णु के दशावतारों में से सातवें अवतार हैं. राम के जीवनकाल एवं पराक्रम का वर्णन,...


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आरती अम्बे गौरी जी की

मां गौरी या आंबे (पार्वती) हिमालय की पुत्री तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं. देवी गौरी का ध्यान, स्रोत पाठ और कवच का पाठ करने से 'सोमचक्र' जागृति होता है जिससे संकट से मुक्ति मिलती है और धन, सम्पत्ति और श्री की वृद्धि होती है. भगवान...


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आरती श्री दुर्गाजी की

दुर्गा पार्वती का दूसरा नाम है. हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त सम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है). पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है. दुर्गा,...


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आरती महालक्ष्मी जी की

देवी की जितनी भी शक्तियां मानी गयी हैं, उन सब की मूल भगवती लक्ष्मी ही हैं. ये ही सर्वोत्कृष्ट पराशक्ति हैं. इनके दो रूप- श्री और लक्ष्मी हैं. दोनों ही रूपों में ये भगवान विष्णु की पत्नी हैं. लक्ष्मी जी की थोड़ी-सी कृपा से व्यक्ति वैभववान...


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आरती रामायण जी की

रामायण आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है. इसमें 24000 श्लोक हैं. यह हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी है. इसे आदिकाव्य या  वाल्मीकि रामायण भी कहा जाता है. कालांतर...


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आरती सन्तोषी माता जी की

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार संतोषी माता एक देवी हैं जिनका शुक्रवार का व्रत किया जाता है. संतोषी माता गणेश और रिद्धि-सिद्धि की पुत्री हैं. उनके पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि का परिवार धन, धान्य, सोना, चाँदी, मूँगा, रत्नों से भरा...


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गायत्री माता

भगवती गायत्री आद्यशक्ति प्रकृति के पाँच स्वरूपों में एक मानी गयी हैं. इनका विग्रह तपाये हुए स्वर्ण के समान है. यही वेद माता कहलाती हैं. सविता के मुख से इनका प्रादुर्भाव हुआ था. भगवान सूर्य ने इन्हें ब्रह्माजी को समर्पित कर दिया. तभी...


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ॐ जय जगदीश हरे

भगवान जगदीश जी की आरती प्रसिद्ध आरतियों में से एक है. इन्हें सत्यनारायण भगवान के नाम से जाना जाता है. इनके पूजन एवं आरती करने से भक्त सभी कष्टों से मुक्त होकर भाव सागर को पार हो जाता है. ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त...


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ॐ जय शिव ओंकारा | Om Jai Shiv Omkara

हिंदू धर्म ग्रंथ पुराण के अनुसार भगवान शिव ही समस्त सृष्टि के आदि कारण हैं. उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु सहित समस्त सृष्टि का उद्भव हुआ हैं. शिव को देवों के देव अर्थात महादेव कहते हैं, इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से...


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गणपति की सेवा मंगल मेवा

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक...


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Guru Gorakh Nath ki (आरती गुरु गोरख नाथ की)

जय गोरख देवा जय गोरख देवा । कर कृपा मम ऊपर नित्य करूँ सेवा । शीश जटा अति सुंदर भाल चन्द्र सोहे । कानन कुंडल झलकत निरखत मन मोहे । गल सेली विच नाग सुशोभित तन भस्मी धारी ।। आदि पुरुष योगीश्वर संतन हितकारी । नाथ नरंजन आप ही...


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Prabhu Janam Ki Aarti (प्रभु जन्म की आरती)

भय प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशिल्या हितकारी | हरषित महतारी मुनि-मन हारी अदभुत रूप निहारी ।। लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा निज आयुध भुजचारी । भूषण बन माला नयन विशाला शोभा सिन्धु खरारी।। कह दुई कर जोरी स्तुति तोरी केहिविधि...


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Brihaspati Ji Ki Aarti (आरती बृहस्पति जी की )

जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा । छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा ॥ तुम पुरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता । तन,...


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Mangalvaar Ki Arti (मंगलवार की आरती)

आज मंगलवार हे। महावीर का वार हे। ये सच्चा दरबार है. सच्चे मन से जो कोई ध्यावे.. उसका बेडा पार हे। चैत सुदी पूनम मंगल का, जन्म वीर ने पाया हे। लाल लंगोट, गदा हाथ मे, सिर पर मुकट सजाया हे। शंकर का अवतार हे, महावीर का वार हे। सच्चे...


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आरती श्री भैरवनाथ जी महाराज की

आरती का अर्थ है पूरी भक्ति भाव के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। सुनो जी भैरव लाडिले...


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मां शारदा की आरती

माँ सरस्वती को शारदा भी कहा जाता है। सरस्वती माँ को ज्ञान की देवी कही जाती हैं। सरस्वती माँ की पुजा और उपासना करने से व्यक्ति को सद्बुद्धि आती है| स्कूलों में माँ सरस्वती आराधना प्रातः कराई जाती है। माँ सरस्वती अपने जिस भक्त पर प्रशन्न...


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शीतला माता की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता।। ऊँ जय शीतला माता। रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता। ऋद्धिसिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता।। ऊँ जय शीतला माता। ...


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Shree Ganesh Aarti, Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक...


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