Calendar 2016

Hidden Facts of Gods and Godess


क्या आप जानते हैं भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है?

एक बार ऐसा हुआ कि दैत्यों ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। देवता परेशान होकर भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने कहा -ऐसा करो कि समुद्र को मथो। जब उसे मथोगे तो उसमें से अमृत निकलेगा और वो अमृत तुम पी लेना तो तुम अमर हो जाओगे उसके बाद लड़ते रहना दैत्यों से। पर इसमें दैत्यों की भी जरूरत पड़ेगी। सारे देवतओं ने मिलकर...read more


जानिये क्या हुआ? जब रावण ने वरदान में पार्वती को ही मांग लिया


एक बार रावण ने जब शिवजी की स्तुति की तो शिवजी इतने प्रसन्न हुए कि रावण को अपना भक्त बनाकर जो भी मांगा वो सब दे दिया और जैसे ही प्रणाम करके रावण उठा तो दुष्ट रावण ने देखा कि शिवजी के पास पार्वती खड़ी थी और माता पार्वती बहुत ही सुंदर थी।...read more


आइये जानते हैं शिव पार्वती के विवाह के पीछे का सच


तारकासुर राक्षस के अत्याचारों से जब सभी देवता परेशान हो गए तब उन्होंने ब्रह्माजी की शरण ली। ब्रह्माजी ने कहा शिवजी से प्रार्थना करों क्योंकि शिव-पार्वती का पुत्र ही तारकासुर का वध कर सकता है। लेकिन एक सबसे बड़ी समस्या है। वे समाधि...read more


क्या आप बाबा भैरवनाथ को खुश करना चाहेंगे? जानिए बाबा भैरवनाथ को खुश करने के 10 उपाय


बाबा भैरवनाथ को माता वैष्णो देवी का वरदान प्राप्त है, बिना भैरवनाथ के दर्शन के माता वैष्णो देवी के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। ऐसे में बाबा भैरवनाथ की पूजा भी अति आवश्यक हो जाती है, ऐसे तो बाबा भैरवनाथ को खुश करना काफी आसान है लेकिन...read more


बाबा भैरवनाथ की कहानी | माता गौरी व्रत कथा


प्राचीन काल में गुरु गोरखनाथ के सम्प्रदाय का भैरवनाथ नाम का एक योगी बहुत बड़ा सिद्ध तांत्रित और महा प्रभावशाली था। वह वैष्णवों तथा भक्ति के उपासकों अर्थात् शाक्तों का कट्टर व परम शत्रु था। जहां कहीं भी उसे वैष्णव या शाक्त धर्मावलंबी,...read more


चन्द्रदेव कौन हैं, और क्या है इनके पीछे का इतिहास?


चन्द्रदेव महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र माने जाते हैं। इनका वर्ण गौर है। चंद्रदेव अनादि एवं अजेय हैं। चंद्रदेव के वस्त्र, अश्व और रथ श्वेत रंग के हैं। शंख के समान उज्जवल दस घोड़ों वाले अपने रथ पर ये कमल के आसन पर विराजमान हैं।...read more


भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा वामन रूप में जन्म


उस समय दैत्यों का राजा बलि हुआ करता था। बलि बड़ा पराक्रमी राजा था। उसने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। उसकी शक्ति के घबराकर सभी देवता भगवान वामन के पास पहुंचे तब भगवान विष्णु ने अदिति और कश्यप के यहाँ जन्म लिया। एक समय...read more


क्या आप जानते हैं, राहू-केतु क्यों हैं सूर्य-चंद्र के दुश्मन?


समुद्र मंथन से उत्त्पन्न अमृत को दैत्यों से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप लिया और छलपूर्वक देवताओं को अमृत पीला दिया। यह बात राहू नामक दैत्य ने जान ली और वह रूप बदलकर देवताओं के बीच जा बैठा। जैसे ही राहु ने अमृत पीया वैसे...read more


माता सरस्वती ने क्यों दिया ब्रह्मा जी को ये श्राप?


सृष्टि के आरंभ में ही आदि शक्ति ने अपने स्वरुप से सरस्वती को उत्पन्न करके ब्रह्मा जी को पत्नी स्वरुप भेंट किया ताकि ब्रह्मा जी सृष्टि निर्माण का काम पूरा कर सकें। सृष्टि निर्माण का काम पूरा होने के बाद एक दिन पवित्र उद्देश्य को पूरा...read more


भगवान ब्रह्मा का परिचय


भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचियता हैं। ये हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। पुराणों के अनुसार क्षीरसागर में शेषशायी विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा की स्वयं उत्पत्ति हुई, इसलिए ये स्वयंभू कहलाते हैं।...read more


क्या है शक्तिपीठ के पीछे का सच


या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। माता सती की कहानी : आदि सतयुग के राजा दक्ष की पुत्री सती माता को शक्ति कहा जाता है। पिता की ‍अनिच्छा से उन्होंने हिमालय के इलाके में...read more


भगवान विष्णु ने क्यों माता सती के पार्थिव शरीर के टुकड़े-टुकड़े किये


दक्ष प्रजापति की पुत्री सती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी किन्तु उनकी यह इच्छा राजा दक्ष को मंजूर नहीं थी। वे शिव को भूतों और अघोरियों का साथी मानते थे। फिर भी सती ने अपनी जि़द पर भगवान शिव से विवाह कर लिया। एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ...read more