अम्बा भवानी मंदिर - इस शक्तिपीठ में मूर्ति की नहीं यंत्र की होती है पूजा


गुजरात का मां अम्बा-भवानी मदिर 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख पीठ है। माता सती के म्रत शरीर के जब भगवान विष्णु ने 52 टुकड़े किये तब उनके शरीर के अवशेष जहाँ जहाँ गिरे उन सभी जगहों को आज शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। गुजरात का मां अम्बा-भवानी मंदिर उन्ही शक्तिपीठ में से एक हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। यहांं मां का एक श्री यंत्र स्थापित है। इस श्री यंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां विराजमान हैं। नवरात्र में यहां का पूरा वातावरण शक्तिमय रहता है। 

गुजरात स्थित यह मंदिर पालनपुर से लगभग 65 कि.मी, आबू पर्वत से 45 कि.मी, आबू रोड से 20 किमी, श्री अमीरगढ़ से 42 कि.मी, कडियाद्रा से 50 कि.मी. दूरी पर गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरासुर पर्वत के समीप स्थित है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग बारह सौ साल पुराना है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है। श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं।

मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर गब्बर नामक पहाड़ है। इस पहाड़ पर भी देवी मां का प्राचीन मंदिर स्थापित है। माना जाता है यहां एक पत्थर पर मां के पदचिह्न बने हैं। पदचिह्नों के साथ-साथ मां के रथचिह्न भी बने हैं। अम्बाजी के दर्शन के बाद श्रद्धालु गब्बर जरूर जाते हैं।