हरसिद्धि मंदिर - 51 फीट ऊंचे 1011 दीपक हैं 2000 साल पुराने


उज्जैन को भगवान शिव की नगरी माना जाता है यहीं पर 51 शक्तिपीठों में से एक हरसिद्धि मंदिर भी है। यूं तो इसकी और भी कई विशेषताएं हैं, लेकिन एक खास बात जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है, वो है मंदिर प्रांगण में स्थापित 2 दीप स्तंभ।

ये दीप स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं। दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। मान्यता है कि इन दीप स्तंभों की स्थापना उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने करवाई थी। विक्रमादित्य का इतिहास करीब 2 हजार साल पुराना है। इस दृष्टिकोण से ये दीप स्तंभ लगभग 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं।

60 लीटर तेल लगता है एक बार में
51 फीट ऊंचे व तेल से सने हुई दीप स्तंभों पर चढ़कर हजारों दीपकों को जलाना सहज नहीं है, लेकिन उज्जैन निवासी जोशी परिवार लगभग 100 साल से इन दीप स्तंभों को रोशन कर रहा है।

पहले से हो जाती है बुकिंग
हरसिद्धि मंदिर के ये दीप स्तंभ श्रृद्धालुओं के सहयोग से जलाए जाते हैं। इसके लिए हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति में पहले बुकिंग कराई जाती है। प्रमुख त्योहारों जैसे- शिवरात्रि, चैत्र व शारदीय नवरात्रि, धनतेरस व दीपावली पर दीप स्तंभ जलाने की बुकिंग तो साल भर पहले ही श्रृद्धालुओं द्वारा करवा दी जाती है।

रात्रि में विशेष पूजा
रात्रि को हरसिद्धि मंदिर के पट बंद होने के बाद गर्भगृह में विशेष पर्वों के अवसर पर पूजा होती है। श्रीसूक्त और वेदोक्त मंत्रों के साथ होने वाली इस पूजा का तांत्रिक महत्व है। भक्तों की मनोकामना के लिए विशेष तिथियों पर भी यह पूजा होती है।