आइये जानते हैं शिव पार्वती के विवाह के पीछे का सच


तारकासुर राक्षस के अत्याचारों से जब सभी देवता परेशान हो गए तब उन्होंने ब्रह्माजी की शरण ली। ब्रह्माजी ने कहा शिवजी से प्रार्थना करों क्योंकि शिव-पार्वती का पुत्र ही तारकासुर का वध कर सकता है। लेकिन एक सबसे बड़ी समस्या है। वे समाधि में हैं। अगर उनकी समाधि किसी तरह टूट जाए और वे आपकी प्रार्थना स्वीकार कर लें तो उनका जो पुत्र होगा वह देवसेनापति होगा। वही आपकी समस्या का समाधान करेगा। देवताओं के कहने पर कामदेव ने उनकी समाधि भंग कर दी। लेकिन उसे अपना शरीर गंवाना पड़ा। पर देवताओं का काम आसान हो गया। सभी देवता शिवजी के पास गए। उन्होंने शिवजी से प्रार्थना की कि तारकासुर हमें परेशान कर रहा है। अगर आप पार्वती से विवाह कर लें हमारी समस्या दूर होगी। देवताओं की प्रार्थना का असर शिवजी पर हुआ। देवताओं की प्रार्थना से ही शिव दूल्हा बने और उन्होंने पार्वती से विवाह किया। शिव-पार्वती के पुत्र हुए कार्तिकेय। कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने। उन्होंने तारकासुर का वध कर देवताओं को राक्षसों के भय से मुक्त कर दिया। श्रीरामचरितमानस में इसका उल्लेख है- सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहॉं सिव कृपानिकेता॥ पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा॥ अर्थ- विष्णु और ब्रह्मा सहित सभी देवता वहां गए जहां कृपा के धाम शिव थे। उन सबने शिवजी से अलग-अलग प्रार्थना की। तब शिव प्रसन्न हो गए।