पुष्कर स्थित ब्रह्माजी का एकमात्र प्राचीन मंदिर


यह मंदिर विश्व में ब्रह्माजी का एकमात्र प्राचीन मंदिर है। मंदिर के पीछे रत्नागिरि पहाड़ पर जमीन तल से दो हजार तीन सौ 69 फुट की ऊंचाई पर ब्रह्माजी की प्रथम पत्नी सावित्री का मंदिर है। यज्ञ में शामिल नहीं किए जाने से कुपित होकर सावित्री ने केवल पुष्कर में ब्रह्माजी की पूजा किए जाने का श्राप दिया था। पुष्कर को सब तीर्थों का गुरु कहा जाता है। इसे धर्मशास्त्रों में पांच तीर्थों में सर्वाधिक पवित्र माना गया है। पुष्कर, कुरुक्षेत्र, गया, हरिद्वार और प्रयाग को पंचतीर्थ कहा गया है।

अर्द्ध चंद्राकार आकृति में बनी पवित्र एवं पौराणिक पुष्कर झील धार्मिक और आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र रही है। झील की उत्पत्ति के बारे में किंवदंती है कि ब्रह्माजी के हाथ से यहीं पर कमल पुष्प गिरने से जल प्रस्फुटित हुआ जिससे इस झील का उद्भव हुआ। यह मान्यता भी है कि इस झील में डुबकी लगाने से पापों का नाश होता है। झील के चारों ओर 52 घाट व अनेक मंदिर बने हैं। इनमें गऊघाट, वराहघाट, ब्रह्मघाट, जयपुर घाट प्रमुख हैं। जयपुर घाट से सूर्यास्त का नजारा अत्यंत अद्भुत लगता है।

पुष्कर कैसे पहुंचे
पुष्कर सड़क, रेल एवं वायुमार्ग से पहुंचा जा सकता है। वायुयान से यहां आने पर आपको जयपुर हवाई अड्डे पर उतरना होगा। वहां से टैक्सी या बस से आप पुष्कर पहुंच सकते हैं। घूंघरा (अजमेर), देवनगर (पुष्कर) इन दोनों स्थानों पर हैलीपैड बने हुए हैं। हैलीकॉप्टर से आने पर आप यहां उतर सकते हैं। यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर है। राजस्थान के विभिन्न भागों से पुष्कर के लिए बस व टैक्सी चलती है। आप इस सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं।पुष्कर की दूरी जयपुर से 145 कि.मी.कोटा से 220 कि.मी.जोधपुर से 205 कि.मी.दिल्ली से 415 कि.मी. है।