Know How to Celebrate and Why to Celebrate Dhanteras Festival


धनतेरस

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रतिवर्ष धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है. वर्ष 2014 में यह तिथि 21 अक्टूबर को पड़ेगी. कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से भी जाना जाता है. धन्वन्तरि देवताओं के वैद्य हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं.

धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था. इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की भी परम्परा है. 

धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाकर यह पर्व मनाया जाता है. इसकी पूजा के साथ ही दीवाली (दीपावली) के आयोजन शुरू हो जाते हैं. ऐसी धारणा है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है. इस लिए कारोबारियों के लिए धनतेरस का विशेष महत्व होता है. 

लोगों के बीच कहा जाता है कि जिस प्रकार सागर मंथन से देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी उसी प्रकार भगवान धनवन्तरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं. 

प्रथा

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की प्रथा है. यदि यह संभव न हो तो कोई बर्तन ही खरीदें. इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है. संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है. जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है. 

लोक कथा

धनतेरस मनाने की पीछे एक लोक कथा प्रचलित है, जो निम्नलिखित है. 

एक समय में एक राजा थे, जिनका नाम हेम था. दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. ज्योतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा. राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े. दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया.

विवाह के पश्चात विधि के विधान के अनुसार विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे. जब यमदूत राजकुमार का प्राण ले जा रहे थे उस समय उसकी नवविवाहिता पत्नी बहुत ही कारुणिक विलाप करने लगी. विलाप सुनकर यमदूत का हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा. 

यमदूत जब यह कहानी यमराज से कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक यमदूत ने यमदेवता से विनती की. हे! यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए| 

यमदूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले, हे दूत! अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है. इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं, उसे ध्यान से सुनो. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात को जो प्राणी श्रद्धा एवं विश्वास से मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेंट करता है वह अकाल मृत्यु से मुक्त होता है. यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं|


The festival, known as "Dhanatrayodashi" or "Dhanvantari Trayodashi".The word Dhan means wealth and Teras means 13th day as per Hindu calendar. It is celebrated on the thirteenth lunar day of Krishna paksha (dark fortnight) in the Hindu calendar month of Ashwin.