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रक्षा बंधन

हिन्दू कलेंडर के अनुसार रक्षा बंधन का त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण मास (जुलाई-अगस्तं) की पूर्णिमा को मनाया जाता है. वर्ष 2014 में रक्षा बंधन का त्यौहार 10 अगस्त को मनाया जाएगा. इस दिन बहिनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी दीर्घायु व प्रसन्नअता के लिए प्रार्थना करती हैं. भाई अपनी बहिनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं. उत्तरी भारत में यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है.  

रक्षा बंधन का उल्लेख भविष्य पुराण, महाभारत व मुग़लकाल के इतिहास में मिलता है. रक्षा विधान के समय निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण किया जाता है. 

येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्रो महाबल:
दानवेन्द्रो मा चल मा चल.  

रक्षा बंधन की पौराणिक कथा 
भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार  एक बार देवता और दैत्यों  (दानवों) में युद्ध हुआ जो बारह वर्षों तक चला. इस युद्ध में देवता पराजित हो गए. इंद्र हार के भय से दु:खी होकर  देवगुरु बृहस्पति के पास विमर्श हेतु गए. गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से व्रत करके रक्षासूत्र   तैयार किए और  स्वास्तिवाचन के साथ ब्राह्मण की उपस्थिति में इंद्राणी ने वह सूत्र  इंद्र की दाहिनी कलाई में बांधा  जिसके फलस्वरुप इन्द्र सहित समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई. इसी समय से  रक्षा-बंधन अस्तित्व में आया  और यह एक त्यौहार के रूप में प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने लगा.

रक्षा विधान के समय निम्नलिखित मंत्रो का उच्चारण किया गया था. जिसका विधिवत पालन आज भी किया जाता है:

येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्रो महाबल:
दानवेन्द्रो मा चल मा चल.  

इस मंत्र का भावार्थ है कि दानवों के महाबली राजा बलि जिससे बांधे गए थे, उसी से तुम्हें बांधता हूँ. हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो. 

महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बांधने के वृत्तांत मिलते हैं. 

महाभारत  में ही रक्षाबंधन से संबंधित श्रीकृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है. जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई. द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी. यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था. श्रीकृष्ण ने बाद में द्रौपदी के चीर-हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था.


Raksha Bandhan is a Hindu festival that celebrates the love and duty between brothers and sisters; the festival is also popularly used to celebrate any brother-sister like relationship between men and women who are relatives or biologically unrelated. It is called Rakhi Purnima, or simply Rakhi, in many parts of India. The festival is observed by Hindus, Jains, and many Sikhs. Raksha Bandhan is primarily observed in India, Mauritius and parts of Nepal. It is also celebrated by Hindus and Sikhs in parts of Pakistan, and by some people of Indian origin around the world.

Raksha Bandhan is an ancient festival, and has many myths and historic legends linked to it. For example, the Rajput queens practised the custom of sending rakhi threads to neighbouring rulers as token of brotherhood. On Raksha Bandhan, sisters tie a rakhi (sacred thread) on her brother's wrist. This symbolizes the sister's love and prayers for her brother's well-being, and the brother's lifelong vow to protect her. The festival falls on the full moon day (Shravan Poornima) of the Shravan month of the Hindu lunisolar calendar.

Rakhi ritual
On the morning of Raksha Bandhan, the brothers and sisters get together, often in nice dress in the presence of surviving parents, grandparents and other family members. The ritual typically begins in front of a lighted lamp (diya) or candle, which signifies fire deity. The sister and brother face each other. The sister ties the Rakhi on her brother's wrist.

After the prayer, the sister applies a tilak, a colorful mark on the forehead of the brother. After the tilak, the brother pledges to protect her and take care of his sister under all circumstances.

The sister then feeds the brother, with her hands, one or more bites of sweets (desserts), dry fruits and other seasonal delicacies.

Gifts and hugs
The brother gives his sister(s) gifts such as cards, clothes, money or something thoughtful. The brother(s) wear the Rakhi for the entire day, as a reminder of their sister(s) and to mark the festival of Raksha Bandhan.