Mata Gauri: Aarti, Mantra, Vrat Katha, Chalisa, Photos

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम:
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम:

आरती अम्बे गौरी जी की

मां गौरी या आंबे (पार्वती) हिमालय की पुत्री तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं. देवी गौरी का ध्यान, स्रोत पाठ और कवच का पाठ करने से 'सोमचक्र' जागृति होता है जिससे संकट से मुक्ति मिलती है और धन, सम्पत्ति और श्री की वृद्धि होती है. भगवान शिव का मां गौरी से अत्यधिक आत्मीयता होने के कारण ही वह अर्धनारीश्वर कहलाए. जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। जय अम्बे गौरी उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। जय अम्बे गौरी सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। जय...


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वैष्णो देवी के मंत्र

माँ वैष्णो देवी माँ दुर्गा का ही रूप है, अपने भक्तो की रक्षा करने के लिए माँ अम्बे अपने विभिन्न रूपों में आया करती हैं| वैसे तो माँ अम्बे को मनाना बहुत ही आसान है, माँ शारदा अपने भक्तो से श्रध्दा की जगह कुछ और नहीं चाहती| फिर भी नीचे दिये गये मंत्रो का उच्चारण करने से माँ अपने भक्तो अवश्य प्रशन्न होती हैं| इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता वैष्णो देवी को पाद्य(जल) समर्पण करना चाहिए- ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धादि-भिर्युतम् अनिष्ट-हर्ता गृहाणेदं भगवती भक्त-वत्सला |ॐ श्री वैष्णवी नमः पाद्योः पाद्यं समर्पयामि इस मंत्र के द्वारा माता वैष्णो देवी को दक्षिणा...


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Maa Durga Chalisa in Hindi, Shri Durga Chalisa

हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त सम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है). पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है. दुर्गा, शिव की पत्नी पार्वती का एक रूप हैं, जिसकी उत्पत्ति देवताओं की प्रार्थना पर राक्षसों का नाश करने के लिये हुई थी. इस तरह दुर्गा युद्ध की देवी हैं. दुर्गा दो शब्दों- दुर्ग+आ से मिलकर बना है. 'दुर्ग' शब्द का अर्थ दैत्य, महाविघ्न, भवबन्धन, कर्म, शोक, दु:ख, नरक, यमदण्ड, जन्म, महान भय तथा अत्यन्त रोग के सन्दर्भ में आता है तथा 'आ' शब्द का अर्थ 'हन्ता' है. अर्थात जो देवी इन दैत्य...


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माँ अम्बे को इन विभिन्न नामों से जाना जाता है

दुर्गा जी हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके नौ अन्य रूप है जिनकी पूजा नवरात्रों में की जाती है। माना जाता है कि राक्षसों का संहार करने के लिए देवी पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया था  सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा, चंद्रघंटा, महातपा, बुद्धि, अहंकारा, चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमंत्रमयी, सत्ता, सत्यानंदस्वरुपिणी, अनंता, भाविनी, भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता, चिंता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला, पाटलावती,...


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माता दुर्गा की पूजा करने की विधि

दुर्गा जी हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके नौ अन्य रूप है जिनकी पूजा नवरात्रों में की जाती है। माना जाता है कि राक्षसों का संहार करने के लिए देवी पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया था। सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, पंचामृत( दूध, दही, घी, शहद, शक्कर ), सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा। गुड़हल के फूल, नारियल। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गणेश पूजन प्रथमपूजनीय गणपति...


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वैष्णोदेवी - जानिये अनकहे तथ्य एवं कहानियाँ

वैष्णो देवी का मंदिर, 5,200 फीट की ऊंचाई और कटरा से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माता वैष्णो देवी उत्तरी भारत के सबसे पूजनीय और पवित्र स्थलों में से एक है। यह मंदिर पहाड़ पर स्थित होने के कारण अपनी भव्यता व सुंदरता के कारण भी प्रसिद्ध है। हर साल लाखों तीर्थ यात्री मंदिर के दर्शन करते हैं।  माता वैष्णो देवी की कथा श्रीधर नाम का एक ब्राह्मण था। वह मां वैष्णो देवी का भक्त था।श्रीधर वर्तमान कटरा कस्बे से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित हंसली गांव में रहता था। एक बार उन्होंने अपने घर पर कन्या भोज का आयोजन किया। भोजन के बाद सारी कन्याएं अपने घर चली गई। एक कन्या नहीं गई। वह कन्या...


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