Shree Ganesh: Aarti, Mantra, Vrat Katha, Chalisa, Photos

श्री गणेशाय नम:
ॐ श्री गणेशाय नम:
गं गणपतये नम:
ॐ गं गणपतये नम:
ॐ गं ॐ

गणपति की सेवा मंगल मेवा

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक शुभ कार्य प्रारम्भ करने के पहले गणेश का ही पूजन किया जाता है. इससे सभी कार्य पूर्णता को प्रदान करते हैं. गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न टरैं। तीन लोक के सकल देवता, द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा...। रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें, अरु आनन्द सों चमर करैं। धूप-दीप अरू लिए आरती भक्त खड़े जयकार...


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Lord Ganesha Mantra for Pooja, Various Mantra of Lord Ganesha

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक शुभ कार्य प्रारम्भ करने के पहले गणेश का ही पूजन किया जाता है. इससे सभी कार्य पूर्णता को प्रदान करते हैं. प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी को विनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदर के नाम से भी जाना जाता हैं।  भगवान गणेश जी के मंत्र निम्नानुशार हैं: किसी भी कार्य के प्रारंभ में गणेश जी को इस मंत्र से प्रसन्न करना चाहिए: श्री...


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Lord Shree Ganesha Chalisa

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक शुभ कार्य प्रारम्भ करने के पहले गणेश का ही पूजन किया जाता है. इससे सभी कार्य पूर्णता को प्रदान करते हैं. प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी को विनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदर के नाम से भी जाना जाता हैं।  ।। दोहा ।। एकदंत्त शुभ गज वदन विघ्न विनाशक नाम।  श्रीगणेश सिद्धि सदन गणनायक सुख धाम ।। मंगल मूर्ति महान श्री ऋद्धि सिद्धि...


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Lord Ganesha 108 Names Their Meanings and Mantra

1. विश्व नॆत्र ॐ विश्व नॆत्रॆ नमः। 2. विराट्पति ॐ विराट्पतयॆ नमः। 3. श्रीपति ॐ श्रीपतयॆ नमः। 4. वाक्पति ॐ वाक्पतयॆ नमः। 5 शृङ्गारिण ॐ शृङ्गारिणॆ नमः। 6. अश्रितवत्सल ॐ अश्रितवत्सलाय नमः। 7. शिवप्रिय ॐ शिवप्रियाय नमः। 8. शीघ्रकारिण ॐ शीघ्रकारिणॆ नमः। 9. शाश्वत ॐ शाश्वताय नमः। 10. बल ॐ बल नमः। 11. बलॊत्थिताय ॐ बलॊत्थिताय नमः। 12 भवात्मजाय ॐ भवात्मजाय नमः। 13. पुराण पुरुष ॐ पुराण पुरुषाय नमः। 14. पूष्णॆ ॐ पूष्णॆ नमः।...


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Lord Ganesha Stuti

गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग-अलग अवतार लिया. गणेश भगवान गणों के स्वामी हैं इस लिए इनका एक नाम गणपति भी है. ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं. जीवन में प्रत्येक शुभ कार्य प्रारम्भ करने के पहले गणेश का ही पूजन किया जाता है. इससे सभी कार्य पूर्णता को प्रदान करते हैं. प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी को विनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदर के नाम से भी जाना जाता हैं। गणेश स्तुति श्लोक ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर...


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दारिद्रयदहन शिव स्तोत्र | द्रारिद्रता का दहन करने वाला स्त्रोत

दारिद्रयदहन शिव स्तोत्र द्रारिदय दहन स्त्रोत का अर्थ है-द्रारिद्रता का दहन करने वाला स्त्रोत। जिस स्तुति को सुनकर शिव आनंदित हो उठें, ऐसे प्रभाव वाला द्रारिद्रय दहन शिव स्त्रोत है। शिव पूजन के बाद इस स्त्रोत का पाठ किया जाना शिव को प्रसन्न करता है। इस स्त्रोत के पाठ से जीवन की दरिद्रता से छुटकारा मिलता है। जैसे कि अग्नि में जलकर कोई चीज जलकर राख हो जाती है। शिव की प्रसन्नता जीवन में सौभाग्य लाती है। विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय  दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय।।1।। गौरीप्रियाय...


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कैसे करें संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Vidhi)

मान्यतानुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा सुननी चाहिए। रात के समय चन्द्रोदय होने पर गणेश जी का पूजन कर ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। इस दिन गणेश जी का व्रत-पूजन करने से धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है और समस्त परेशानियों से मुक्ति मिलती है। कैसे करें संकष्टी गणेश चतुर्थी :-  चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।  इस दिन व्रतधारी लाल रंग के वस्त्र धारण करें।  श्रीगणेश की पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व अथवा...


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अद्भुत: कनिपक्कम स्थित गणपति मंदिर, रोज बढ़ता है मूर्ति का आकार

कनिपक्कम स्थित गणपति मंदिर कहते हैं कि इस मंदिर में मौजूद विनायक की मूर्ति का आकार हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस बात से आपको भी हैरानी हो रही होगी, लेकिन यहां के लोगों का मानना है कि प्रतिदिन गणपति की ये मूर्ति अपना आकार बढ़ा रही है। इस बात का प्रमाण उनका पेट और घुटना है, जो बड़ा आकार लेता जा रहा है। कहा जाता है कि विनायक की एक भक्त श्री लक्ष्माम्मा ने उन्हें एक कवच भेंट किया था, लेकिन प्रतिमा का आकार बढऩे की वजह से अब उसे पहनाना मुश्किल हो गया है। विघ्नहर्ता कनिपक्कम गणपति मंदिर आंध्रप्रदेश वैसे तो गणपति बप्पा के कई रूप है और देश में अनेकों ऐसे गणेश...


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