Vishnu ji: Aarti, Mantra, Vrat Katha, Chalisa, Photos

Vishnu ji

Adisesh | Adinath | Akshaj

Adisesh | Adinath | Akshaj

ॐ जय जगदीश हरे

भगवान जगदीश जी की आरती प्रसिद्ध आरतियों में से एक है. इन्हें सत्यनारायण भगवान के नाम से जाना जाता है. इनके पूजन एवं आरती करने से भक्त सभी कष्टों से मुक्त होकर भाव सागर को पार हो जाता है. ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी...


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Navgrah Mantra

नवग्रहों के नाम एवं उनके तांत्रिक मंत्र तथा आवाहन मंत्र इस प्रकार है: सूर्य का आवाहन मंत्र तांत्रिक मंत्र : ऊॅं ह्रां हृीं हृौं सः सूर्याय नमः. आवाहन मंत्र : पासनः पद्यकरः पगर्भः समद्युतिः. चन्द्र तांत्रिक मंत्र : ऊॅं श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नमः. आवाहन मंत्र : श्वेतः श्वेताम्बरधरः श्वेताश्चः श्वेतवाहनः. गदापाणिद्र्विबाहुश्च कर्तव्यो वरदः शशी. मंगल तांत्रिक मंत्र : ऊॅं क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः. आवाहन मंत्र : रक्तमालम्बरधरः शक्तिशूलगदाधरः.चतुर्भुजः...


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Read Satyanarayan Vrat Katha in Hindi

भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए चिरपरिचित कथा है. भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा का उल्लेख स्कन्द पुराण के रेवा खण्ड में किया गया है. सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण करने वाली यह कथा समाज के सभी वर्गों को सत्यव्रत की शिक्षा देती है. सत्य को ईश्वर मानकर, निष्ठा के साथ समाज के किसी भी वर्ग का व्यक्ति यदि इस व्रत व कथा का श्रवण करता है, तो उसे इससे निश्चित ही मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. प्रथम अध्याय व्यास जी ने कहा- एक समय की बात है. नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादिक अठ्ठासी हजार ऋषियों ने पुराणवेत्ता श्री...


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भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा वामन रूप में जन्म

उस समय दैत्यों का राजा बलि हुआ करता था। बलि बड़ा पराक्रमी राजा था। उसने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। उसकी शक्ति के घबराकर सभी देवता भगवान वामन के पास पहुंचे तब भगवान विष्णु ने अदिति और कश्यप के यहाँ जन्म लिया। एक समय वामन रूप में विराजमान भगवान विष्णु राजा बलि के यहाँ पहुचे उस समय राजा बलि यज्ञ कर रहा थे।  बलि से उन्होंने कहा राजा मुझे दान दीजिए। बलि ने कहा-मांग लीजिए। वामन ने कहा तीन पग मुझे आपसे धरती चाहिए। दैत्यगुरु भगवान की महिमा जान गए। उन्होंने बलि को दान का संकल्प लेने से मना कर दिया।  लेकिन बलि ने कहा - गुरुजी ये क्या बात कर रहे हैं आप। यदि...


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